(N/A) मान लीजिए एक प्रिज्म $ABC$ है जिसका प्रिज्म कोण $A$ है। एक एकवर्णी प्रकाश किरण $PQ$ प्रिज्म की सतह $AB$ पर $i$ आपतन कोण पर आपतित होती है। यह $r_1$ अपवर्तन कोण के साथ $QR$ पथ पर अपवर्तित होती है। सतह $AC$ पर,यह $r_2$ कोण पर आपतित होती है और $e$ निर्गत कोण के साथ $RS$ के रूप में बाहर निकलती है।
$1$. चतुर्भुज $AQNR$ में (जहाँ $N$,$Q$ और $R$ पर अभिलंबों का प्रतिच्छेदन बिंदु है),सम्मुख कोणों का योग $180^{\circ}$ होता है:
$\angle A + \angle QNR = 180^{\circ}$ --- $(1)$
$2$. $\triangle QNR$ में,त्रिभुज के तीनों कोणों का योग $180^{\circ}$ होता है:
$r_1 + r_2 + \angle QNR = 180^{\circ}$ --- $(2)$
$(1)$ और $(2)$ की तुलना करने पर:
$A = r_1 + r_2$ --- $(3)$
$3$. कुल विचलन $\delta$,आपतित किरण $PQ$ को आगे बढ़ाने और निर्गत किरण $RS$ को पीछे बढ़ाने पर बनने वाला कोण है। $\triangle DQR$ में (जहाँ $D$ विस्तारित किरणों का प्रतिच्छेदन बिंदु है):
$\delta = (i - r_1) + (e - r_2)$
$\delta = (i + e) - (r_1 + r_2)$
इस समीकरण में $(3)$ का मान रखने पर:
$\delta = i + e - A$
अतः,अंतिम संबंध है:
$i + e = A + \delta$